॥ श्रीहरिः ॥
तस्य धार्ष्ट्यं कपेर्वीक्ष्य तरुण्यो जातिचापलाः।
हास्यप्रिया विजहसुर्बलदेवपरिग्रहाः॥ १२
tasya dhārṣṭyaṃ kapervīkṣya taruṇyo jāticāpalāḥ|
hāsyapriyā vijahasurbaladevaparigrahāḥ|| 12
अर्थ
युवती स्त्रियाँ स्वभावसे ही चंचल और हास-परिहासमें रुचि रखनेवाली होती हैं। बलरामजीकी स्त्रियाँ उस वानरकी ढिठाई देखकर हँसने लगीं॥ १२॥
तस्य धार्ष्ट्यं कपेर्वीक्ष्य तरुण्यो जातिचापलाः।
हास्यप्रिया विजहसुर्बलदेवपरिग्रहाः॥ १२
युवती स्त्रियाँ स्वभावसे ही चंचल और हास-परिहासमें रुचि रखनेवाली होती हैं। बलरामजीकी स्त्रियाँ उस वानरकी ढिठाई देखकर हँसने लगीं॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.67.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 552) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/67/12/