आकाशमें देवता लोग ‘जय-जय’, सिद्ध लोग ‘नमो नमः’ और बड़े-बड़े ऋषि-मुनि ‘साधु-साधु’ के नारे लगाने और बलरामजीपर फूलोंकी वर्षा करने लगे॥ २७॥
जयशब्दो नमःशब्दः साधु साध्विति चाम्बरे।
सुरसिद्धमुनीन्द्राणामासीत् कुसुमवर्षिणाम्॥ २७
आकाशमें देवता लोग ‘जय-जय’, सिद्ध लोग ‘नमो नमः’ और बड़े-बड़े ऋषि-मुनि ‘साधु-साधु’ के नारे लगाने और बलरामजीपर फूलोंकी वर्षा करने लगे॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.67.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 553) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/67/27/