वहाँ उसने देखा कि यदुवंशशिरोमणि बलरामजी सुन्दर-सुन्दर युवतियोंके झुंडमें विराजमान हैं। उनका एक-एक अंग अत्यन्त सुन्दर और दर्शनीय है और वक्षःस्थलपर कमलोंकी माला लटक रही है॥ ९॥
तत्रापश्यद् यदुपतिं रामं पुष्करमालिनम्।
सुदर्शनीयसर्वांगं ललनायूथमध्यगम्॥ ९
वहाँ उसने देखा कि यदुवंशशिरोमणि बलरामजी सुन्दर-सुन्दर युवतियोंके झुंडमें विराजमान हैं। उनका एक-एक अंग अत्यन्त सुन्दर और दर्शनीय है और वक्षःस्थलपर कमलोंकी माला लटक रही है॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.67.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 551) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/67/9/