हस्तिनापुर पहुँचकर बलरामजी नगरके बाहर एक उपवनमें ठहर गये और कौरवलोग क्या करना चाहते हैं, इस बातका पता लगानेके लिये उन्होंने उद्धवजीको धृतराष्ट्रके पास भेजा॥ १६॥
गत्वा गजाह्वयं रामो बाह्योपवनमास्थितः।
उद्धवं प्रेषयामास धृतराष्ट्रं बुभुत्सया॥ १६
हस्तिनापुर पहुँचकर बलरामजी नगरके बाहर एक उपवनमें ठहर गये और कौरवलोग क्या करना चाहते हैं, इस बातका पता लगानेके लिये उन्होंने उद्धवजीको धृतराष्ट्रके पास भेजा॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.68.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 555) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/68/16/