श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.68.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 68 · अथाष्टषष्टितमोऽध्यायः

तं संगम्य यथान्यायं गामर्घ्यं च न्यवेदयन्।

तेषां ये तत्प्रभावज्ञाः प्रणेमुः शिरसा बलम्॥ १९

taṃ saṃgamya yathānyāyaṃ gāmarghyaṃ ca nyavedayan|

teṣāṃ ye tatprabhāvajñāḥ praṇemuḥ śirasā balam|| 19

अर्थ

फिर अपनी-अपनी अवस्था और सम्बन्धके अनुसार सब लोग बलरामजीसे मिले तथा उनके सत्कारके लिये उन्हें गौ अर्पण की एवं अर्घ्य प्रदान किया। उनमें जो लोग भगवान् बलरामजीका प्रभाव जानते थे, उन्होंने सिर झुकाकर उन्हें प्रणाम किया॥ १९॥

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