‘सर्वसमर्थ राजाधिराज महाराज उग्रसेनने तुमलोगोंको एक आज्ञा दी है। उसे तुमलोग एकाग्रता और सावधानीके साथ सुनो और अविलम्ब उसका पालन करो॥ २१॥
उग्रसेनः क्षितीशेशो यद् व आज्ञापयत् प्रभुः।
तदव्यग्रधियः श्रुत्वा कुरुध्वं मा विलम्बितम्॥ २१
‘सर्वसमर्थ राजाधिराज महाराज उग्रसेनने तुमलोगोंको एक आज्ञा दी है। उसे तुमलोग एकाग्रता और सावधानीके साथ सुनो और अविलम्ब उसका पालन करो॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.68.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 556) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/68/21/