श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.68.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 68 · अथाष्टषष्टितमोऽध्यायः

उग्रसेनः क्षितीशेशो यद् व आज्ञापयत् प्रभुः।

तदव्यग्रधियः श्रुत्वा कुरुध्वं मा विलम्बितम्॥ २१

ugrasenaḥ kṣitīśeśo yad va ājñāpayat prabhuḥ|

tadavyagradhiyaḥ śrutvā kurudhvaṃ mā vilambitam|| 21

अर्थ

‘सर्वसमर्थ राजाधिराज महाराज उग्रसेनने तुमलोगोंको एक आज्ञा दी है। उसे तुमलोग एकाग्रता और सावधानीके साथ सुनो और अविलम्ब उसका पालन करो॥ २१॥

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