श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.68.25

दशम स्कन्ध · अध्याय 68 · अथाष्टषष्टितमोऽध्यायः

एते यौनेन सम्बद्धाः सहशय्यासनाशनाः।

वृष्णयस्तुल्यतां नीता अस्मद्दत्तनृपासनाः॥ २५

ete yaunena sambaddhāḥ sahaśayyāsanāśanāḥ|

vṛṣṇayastulyatāṃ nītā asmaddattanṛpāsanāḥ|| 25

अर्थ

इन यदुवंशियोंके साथ किसी प्रकार हमलोगोंने विवाह-सम्बन्ध कर लिया। ये हमारे साथ सोने-बैठने और एक पंक्तिमें खाने लगे। हमलोगोंने ही इन्हें राजसिंहासन देकर राजा बनाया और अपने बराबर बना लिया॥ २५॥✎ 1703

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1703 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: तिल-मिला → तिलमिला

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें