उन्होंने उसकी नोकसे बार-बार चोट करके हस्तिनापुरको उखाड़ लिया और उसे डुबानेके लिये बड़े क्रोधसे गंगाजीकी ओर खींचने लगे॥ ४१॥
लांगलाग्रेण नगरमुद्विदार्य गजाह्वयम्।
विचकर्ष स गंगायां प्रहरिष्यन्नमर्षितः॥ ४१
उन्होंने उसकी नोकसे बार-बार चोट करके हस्तिनापुरको उखाड़ लिया और उसे डुबानेके लिये बड़े क्रोधसे गंगाजीकी ओर खींचने लगे॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.68.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 558) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/68/41/