श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.69.16

दशम स्कन्ध · अध्याय 69 · अथैकोनसप्ततितमोऽध्यायः

सम्पूज्य देवऋषिवर्यमृषिः पुराणो

नारायणो नरसखो विधिनोदितेन।

वाण्याभिभाष्य मितयामृतमिष्टया तं

प्राह प्रभो भगवते करवाम हे किम्॥ १६

sampūjya devaṛṣivaryamṛṣiḥ purāṇo

nārāyaṇo narasakho vidhinoditena|

vāṇyābhibhāṣya mitayāmṛtamiṣṭayā taṃ

prāha prabho bhagavate karavāma he kim|| 16

अर्थ

नरशिरोमणि नरके सखा सर्वदर्शी पुराणपुरुष भगवान् नारायणने शास्त्रोक्त विधिसे देवर्षिशिरोमणि भगवान् नारदकी पूजा की। इसके बाद अमृतसे भी मीठे किन्तु थोड़े शब्दोंमें उनका स्वागत-सत्कार किया और फिर कहा—‘प्रभो! आप तो स्वयं समग्र ज्ञान, वैराग्य, धर्म, यश, श्री और ऐश्‍वर्यसे पूर्ण हैं। आपकी हम क्या सेवा करें’?॥ १६॥✎ 1704

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1704 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: मुकुट-मणि → मुकुटमणि

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