मन्त्रयन्तं च कस्मिंश्चिन्मन्त्रिभिश्चोद्धवादिभिः।
जलक्रीडारतं क्वापि वारमुख्याबलावृतम्॥ २७
mantrayantaṃ ca kasmiṃścinmantribhiścoddhavādibhiḥ|
jalakrīḍārataṃ kvāpi vāramukhyābalāvṛtam|| 27
अर्थ
किसी महलमें उद्धव आदि मन्त्रियोंके साथ किसी गम्भीर विषयपर परामर्श कर रहे हैं, तो कहीं उत्तमोत्तम वारांगनाओंसे घिरकर जलक्रीडा कर रहे हैं॥ २७॥✎ 1705
मन्त्रयन्तं च कस्मिंश्चिन्मन्त्रिभिश्चोद्धवादिभिः।
जलक्रीडारतं क्वापि वारमुख्याबलावृतम्॥ २७
किसी महलमें उद्धव आदि मन्त्रियोंके साथ किसी गम्भीर विषयपर परामर्श कर रहे हैं, तो कहीं उत्तमोत्तम वारांगनाओंसे घिरकर जलक्रीडा कर रहे हैं॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.69.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 564) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/69/27/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)