श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.69.4

दशम स्कन्ध · अध्याय 69 · अथैकोनसप्ततितमोऽध्यायः

उत्फुल्लेन्दीवराम्भोजकह्लारकुमुदोत्पलैः।

छुरितेषु सरस्सूच्चैः कूजितां हंससारसैः॥ ४

utphullendīvarāmbhojakahlārakumudotpalaiḥ|

churiteṣu sarassūccaiḥ kūjitāṃ haṃsasārasaiḥ|| 4

अर्थ

निर्मल जलसे भरे सरोवरोंमें नीले, लाल और सफेद रंगके भाँति-भाँतिके कमल खिले हुए थे। कुमुद (कोईं) और नवजात कमलोंकी मानो भीड़ ही लगी हुई थी। उनमें हंस और सारस कलरव कर रहे थे॥ ४॥

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