इसके बाद भगवान् श्रीकृष्ण सात्यकि और उद्धवजीके साथ अपने हाथसे सारथिका हाथ पकड़कर रथपर सवार होते—ठीक वैसे ही जैसे भुवनभास्कर भगवान् सूर्य उदयाचलपर आरूढ़ होते हैं॥ १५॥
गृहीत्वा पाणिना पाणी सारथेस्तमथारुहत्।
सात्यक्युद्धवसंयुक्तः पूर्वाद्रिमिव भास्करः॥ १५
इसके बाद भगवान् श्रीकृष्ण सात्यकि और उद्धवजीके साथ अपने हाथसे सारथिका हाथ पकड़कर रथपर सवार होते—ठीक वैसे ही जैसे भुवनभास्कर भगवान् सूर्य उदयाचलपर आरूढ़ होते हैं॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.70.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 568) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/70/15/