श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.70.22

दशम स्कन्ध · अध्याय 70 · अथ सप्ततितमोऽध्यायः

तत्रैकः पुरुषो राजन्‍नागतोऽपूर्वदर्शनः।

विज्ञापितो भगवते प्रतीहारैः प्रवेशितः॥ २२

tatraikaḥ puruṣo rājannāgato'pūrvadarśanaḥ|

vijñāpito bhagavate pratīhāraiḥ praveśitaḥ|| 22

अर्थ

एक दिनकी बात है, द्वारकापुरीमें राजसभाके द्वारपर एक नया मनुष्य आया। द्वारपालोंने भगवान्‌को उसके आनेकी सूचना देकर उसे सभाभवनमें उपस्थित किया॥ २२॥✎ 1707

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1707 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: निष्काम-भाव → निष्कामभाव

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