श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.70.40

दशम स्कन्ध · अध्याय 70 · अथ सप्ततितमोऽध्यायः

अथाप्याश्रावये ब्रह्म नरलोकविडम्बनम्।

राज्ञः पैतृष्वसेयस्य भक्तस्य च चिकीर्षितम्॥ ४०

athāpyāśrāvaye brahma naralokaviḍambanam|

rājñaḥ paitṛṣvaseyasya bhaktasya ca cikīrṣitam|| 40

अर्थ

प्रभो! आप स्वयं परब्रह्म हैं, तथापि मनुष्योंकी-सी लीलाका नाट्य करते हुए मुझसे पूछ रहे हैं। इसलिये आपके फुफेरे भाई और प्रेमी भक्त राजा युधिष्ठिर क्या करना चाहते हैं, यह बात मैं आपको सुनाता हूँ॥ ४०॥✎ 2128

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2128 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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