श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.71.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 71 · अथैकसप्ततितमोऽध्यायः

राजदूतमुवाचेदं भगवान् प्रीणयन् गिरा।

मा भैष्ट दूत भद्रं वो घातयिष्यामि मागधम्॥ १९

rājadūtamuvācedaṃ bhagavān prīṇayan girā|

mā bhaiṣṭa dūta bhadraṃ vo ghātayiṣyāmi māgadham|| 19

अर्थ

इसके बाद भगवान् श्रीकृष्णने जरासन्धके बंदी नरपतियोंके दूतको अपनी मधुर वाणीसे आश्‍वासन देते हुए कहा—‘दूत! तुम अपने राजाओंसे जाकर कहना—डरो मत! तुमलोगोंका कल्याण हो। मैं जरासन्धको मरवा डालूँगा’॥ १९॥✎ 2129

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2129 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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