राजा जरासन्ध ब्राह्मणोंका भक्त और गृहस्थोचित धर्मोंका पालन करनेवाला था। उपर्युक्त तीनों क्षत्रिय ब्राह्मणका वेष धारण करके अतिथि-अभ्यागतोंके सत्कारके समय जरासन्धके पास गये और उससे इस प्रकार याचना की—॥ १७॥
ते गत्वाऽऽतिथ्यवेलायां गृहेषु गृहमेधिनम्।
ब्रह्मण्यं समयाचेरन् राजन्या ब्रह्मलिंगिनः॥ १७
राजा जरासन्ध ब्राह्मणोंका भक्त और गृहस्थोचित धर्मोंका पालन करनेवाला था। उपर्युक्त तीनों क्षत्रिय ब्राह्मणका वेष धारण करके अतिथि-अभ्यागतोंके सत्कारके समय जरासन्धके पास गये और उससे इस प्रकार याचना की—॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.72.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 582) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/72/17/