श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.72.28

दशम स्कन्ध · अध्याय 72 · अथ द्विसप्ततितमोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

युद्धं नो देहि राजेन्द्र द्वन्द्वशो यदि मन्यसे।

युद्धार्थिनो वयं प्राप्ता राजन्या नान्‍नकांक्षिणः॥ २८

yuddhaṃ no dehi rājendra dvandvaśo yadi manyase|

yuddhārthino vayaṃ prāptā rājanyā nānnakāṃkṣiṇaḥ|| 28

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने कहा—‘राजेन्द्र! हमलोग अन्‍नके इच्छुक ब्राह्मण नहीं हैं, क्षत्रिय हैं; हम आपके पास युद्धके लिये आये हैं। यदि आपकी इच्छा हो तो हमें द्वन्द्वयुद्धकी भिक्षा दीजिये॥ २८॥

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