भगवान् श्रीकृष्णने कहा—‘राजेन्द्र! हमलोग अन्नके इच्छुक ब्राह्मण नहीं हैं, क्षत्रिय हैं; हम आपके पास युद्धके लिये आये हैं। यदि आपकी इच्छा हो तो हमें द्वन्द्वयुद्धकी भिक्षा दीजिये॥ २८॥
युद्धं नो देहि राजेन्द्र द्वन्द्वशो यदि मन्यसे।
युद्धार्थिनो वयं प्राप्ता राजन्या नान्नकांक्षिणः॥ २८
भगवान् श्रीकृष्णने कहा—‘राजेन्द्र! हमलोग अन्नके इच्छुक ब्राह्मण नहीं हैं, क्षत्रिय हैं; हम आपके पास युद्धके लिये आये हैं। यदि आपकी इच्छा हो तो हमें द्वन्द्वयुद्धकी भिक्षा दीजिये॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.72.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 584) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/72/28/