श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.72.31

दशम स्कन्ध · अध्याय 72 · अथ द्विसप्ततितमोऽध्यायः

न त्वया भीरुणा योत्स्ये युधि विक्लवचेतसा।

मथुरां स्वपुरीं त्यक्त्वा समुद्रं शरणं गतः॥ ३१

na tvayā bhīruṇā yotsye yudhi viklavacetasā|

mathurāṃ svapurīṃ tyaktvā samudraṃ śaraṇaṃ gataḥ|| 31

अर्थ

परन्तु कृष्ण! तुम तो बड़े डरपोक हो। युद्धमें तुम घबरा जाते हो। यहाँतक कि मेरे डरसे तुमने अपनी नगरी मथुरा भी छोड़ दी तथा समुद्रकी शरण ली है। इसलिये मैं तुम्हारे साथ नहीं लड़ूँगा॥ ३१॥

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