श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.72.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 72 · अथ द्विसप्ततितमोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

सम्यग् व्यवसितं राजन् भवता शत्रुकर्शन।

कल्याणी येन ते कीर्तिर्लोकाननु भविष्यति॥ ७

samyag vyavasitaṃ rājan bhavatā śatrukarśana|

kalyāṇī yena te kīrtirlokānanu bhaviṣyati|| 7

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने कहा—शत्रु विजयी धर्मराज! आपका निश्‍चय बहुत ही उत्तम है। राजसूय-यज्ञ करनेसे समस्त लोकोंमें आपकी मंगलमयी कीर्तिका विस्तार होगा॥ ७॥

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