भगवान् श्रीकृष्णने कहा—शत्रु विजयी धर्मराज! आपका निश्चय बहुत ही उत्तम है। राजसूय-यज्ञ करनेसे समस्त लोकोंमें आपकी मंगलमयी कीर्तिका विस्तार होगा॥ ७॥
सम्यग् व्यवसितं राजन् भवता शत्रुकर्शन।
कल्याणी येन ते कीर्तिर्लोकाननु भविष्यति॥ ७
भगवान् श्रीकृष्णने कहा—शत्रु विजयी धर्मराज! आपका निश्चय बहुत ही उत्तम है। राजसूय-यज्ञ करनेसे समस्त लोकोंमें आपकी मंगलमयी कीर्तिका विस्तार होगा॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.72.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 581) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/72/7/