महाराज! पृथ्वीके समस्त नरपतियोंको जीतकर, सारी पृथ्वीको अपने वशमें करके और यज्ञोचित सम्पूर्ण सामग्री एकत्रित करके फिर इस महायज्ञका अनुष्ठान कीजिये॥ ९॥
विजित्य नृपतीन् सर्वान् कृत्वा च जगतीं वशे।
सम्भृत्य सर्वसम्भारानाहरस्व महाक्रतुम्॥ ९
महाराज! पृथ्वीके समस्त नरपतियोंको जीतकर, सारी पृथ्वीको अपने वशमें करके और यज्ञोचित सम्पूर्ण सामग्री एकत्रित करके फिर इस महायज्ञका अनुष्ठान कीजिये॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.72.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 581) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/72/9/