अब हमें कृपा करके आप वह उपाय बतलाइये, जिससे आपके चरणकमलोंकी विस्मृति कभी न हो, सर्वदा स्मृति बनी रहे। चाहे हमें संसारकी किसी भी योनिमें जन्म क्यों न लेना पड़े॥ १५॥✎ 1709
तं नः समादिशोपायं येन ते चरणाब्जयोः।
स्मृतिर्यथा न विरमेदपि संसरतामिह॥ १५
अब हमें कृपा करके आप वह उपाय बतलाइये, जिससे आपके चरणकमलोंकी विस्मृति कभी न हो, सर्वदा स्मृति बनी रहे। चाहे हमें संसारकी किसी भी योनिमें जन्म क्यों न लेना पड़े॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.73.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 588) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/73/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)