श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.73.30

दशम स्कन्ध · अध्याय 73 · अथ त्रिसप्ततितमोऽध्यायः

जगदुः प्रकृतिभ्यस्ते महापुरुषचेष्टितम्।

यथान्वशासद् भगवांस्तथा चक्रुरतन्द्रिताः॥ ३०

jagaduḥ prakṛtibhyaste mahāpuruṣaceṣṭitam|

yathānvaśāsad bhagavāṃstathā cakruratandritāḥ|| 30

अर्थ

वहाँ जाकर उन लोगोंने अपनी-अपनी प्रजासे परमपुरुष भगवान् श्रीकृष्णकी अद्भुत कृपा और लीला कह सुनायी और फिर बड़ी सावधानीसे भगवान्‌के आज्ञानुसार वे अपना जीवन व्यतीत करने लगे॥ ३०॥

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