श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.73.4

दशम स्कन्ध · अध्याय 73 · अथ त्रिसप्ततितमोऽध्यायः

पद्महस्तं गदाशंखरथाङ्गैरुपलक्षितम्।

किरीटहारकटककटिसूत्रांगदाचितम् ॥ ४

padmahastaṃ gadāśaṃkharathāṅgairupalakṣitam|

kirīṭahārakaṭakakaṭisūtrāṃgadācitam || 4

अर्थ

चार भुजाएँ हैं—जिनमें गदा, शंख, चक्र और कमल सुशोभित हैं। वक्षःस्थलपर सुनहली रेखा—श्रीवत्सका चिह्न है और कमलके भीतरी भागके समान कोमल, रतनारे नेत्र हैं। सुन्दर वदन प्रसन्‍नताका सदन है। कानोंमें मकराकृति कुण्डल झिलमिला रहे हैं। सुन्दर मुकुट, मोतियोंका हार, कड़े, करधनी और बाजूबंद अपने-अपने स्थानपर शोभा पा रहे हैं॥ ३-४॥

यह अर्थ श्लोक 3–4 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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