श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.73.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 73 · अथ त्रिसप्ततितमोऽध्यायः

नैनं नाथान्वसूयामो मागधं मधुसूदन।

अनुग्रहो यद् भवतो राज्ञां राज्यच्युतिर्विभो॥ ९

nainaṃ nāthānvasūyāmo māgadhaṃ madhusūdana|

anugraho yad bhavato rājñāṃ rājyacyutirvibho|| 9

अर्थ

मधुसूदन! हमारे स्वामी! हम मगधराज जरासन्धका कोई दोष नहीं देखते। भगवन्! यह तो आपका बहुत बड़ा अनुग्रह है कि हम राजा कहलानेवाले लोग राज्यलक्ष्मीसे च्युत कर दिये गये॥ ९॥✎ 1709

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1709 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: कहलाने-वाले → कहलानेवाले

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