॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.74.19
अर्हति ह्यच्युतः श्रैष्ठ्यं भगवान् सात्वतां पतिः।
एष वै देवताः सर्वा देशकालधनादयः॥ १९
arhati hyacyutaḥ śraiṣṭhyaṃ bhagavān sātvatāṃ patiḥ|
eṣa vai devatāḥ sarvā deśakāladhanādayaḥ|| 19
अर्थ
‘यदुवंशशिरोमणि भक्तवत्सल भगवान् श्रीकृष्ण ही सदस्योंमें सर्वश्रेष्ठ और अग्रपूजाके पात्र हैं; क्योंकि यही समस्त देवताओंके रूपमें हैं; और देश, काल, धन आदि जितनी भी वस्तुएँ हैं, उन सबके रूपमें भी ये ही हैं॥ १९॥