श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.74.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 74 · अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

अर्हति ह्यच्युतः श्रैष्ठ्यं भगवान् सात्वतां पतिः।

एष वै देवताः सर्वा देशकालधनादयः॥ १९

arhati hyacyutaḥ śraiṣṭhyaṃ bhagavān sātvatāṃ patiḥ|

eṣa vai devatāḥ sarvā deśakāladhanādayaḥ|| 19

अर्थ

‘यदुवंशशिरोमणि भक्तवत्सल भगवान् श्रीकृष्ण ही सदस्योंमें सर्वश्रेष्ठ और अग्रपूजाके पात्र हैं; क्योंकि यही समस्त देवताओंके रूपमें हैं; और देश, काल, धन आदि जितनी भी वस्तुएँ हैं, उन सबके रूपमें भी ये ही हैं॥ १९॥

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