श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.74.24

दशम स्कन्ध · अध्याय 74 · अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

सर्वभूतात्मभूताय कृष्णायानन्यदर्शिने।

देयं शान्ताय पूर्णाय दत्तस्यानन्त्यमिच्छता॥ २४

sarvabhūtātmabhūtāya kṛṣṇāyānanyadarśine|

deyaṃ śāntāya pūrṇāya dattasyānantyamicchatā|| 24

अर्थ

जो अपने दान-धर्मको अनन्त भावसे युक्त करना चाहता हो, उसे चाहिये कि समस्त प्राणियों और पदार्थोंके अन्तरात्मा, भेदभावरहित, परम शान्त और परिपूर्ण भगवान् श्रीकृष्णको ही दान करे॥ २४॥

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