॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.74.38
एवमादीन्यभद्राणि बभाषे नष्टमंगलः।
नोवाच किंचिद् भगवान् यथा सिंहः शिवारुतम्॥ ३८
evamādīnyabhadrāṇi babhāṣe naṣṭamaṃgalaḥ|
novāca kiṃcid bhagavān yathā siṃhaḥ śivārutam|| 38
अर्थ
परीक्षित्! सच पूछो तो शिशुपालका सारा शुभ नष्ट हो चुका था। इसीसे उसने और भी बहुत-सी कड़ी-कड़ी बातें भगवान् श्रीकृष्णको सुनायीं। परन्तु जैसे सिंह कभी सियारकी ‘हुआँ-हुआँ’ पर ध्यान नहीं देता, वैसे ही भगवान् श्रीकृष्ण चुप रहे, उन्होंने उसकी बातोंका कुछ भी उत्तर न दिया॥ ३८॥