श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.74.41

दशम स्कन्ध · अध्याय 74 · अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

ततः पाण्डुसुताः क्रुद्धा मत्स्यकैकयसृंजयाः।

उदायुधाः समुत्तस्थुः शिशुपालजिघांसवः॥ ४१

tataḥ pāṇḍusutāḥ kruddhā matsyakaikayasṛṃjayāḥ|

udāyudhāḥ samuttasthuḥ śiśupālajighāṃsavaḥ|| 41

अर्थ

परीक्षित्! अब शिशुपालको मार डालनेके लिये पाण्डव, मत्स्य, केकय और सृंजयवंशी नरपति क्रोधित होकर हाथोंमें हथियार ले उठ खड़े हुए॥ ४१॥

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