श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.74.54

दशम स्कन्ध · अध्याय 74 · अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

य इदं कीर्तयेद् विष्णोः कर्म चैद्यवधादिकम्।

राजमोक्षं वितानं च सर्वपापैः प्रमुच्यते॥ ५४

ya idaṃ kīrtayed viṣṇoḥ karma caidyavadhādikam|

rājamokṣaṃ vitānaṃ ca sarvapāpaiḥ pramucyate|| 54

अर्थ

परीक्षित्! जो पुरुष भगवान् श्रीकृष्णकी इस लीलाका—शिशुपालवध, जरासन्धवध, बंदी राजाओंकी मुक्ति और यज्ञानुष्ठानका कीर्तन करेगा, वह समस्त पापोंसे छूट जायगा॥ ५४॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां दशमस्कन्धे उत्तरार्धे
शिशुपालवधो नाम चतुःसप्ततितमोऽध्यायः॥ ७४॥

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