इत्युक्त्वा यज्ञिये काले वव्रे युक्तान् स ऋत्विजः।
कृष्णानुमोदितः पार्थो ब्राह्मणान् ब्रह्मवादिनः॥ ६
ityuktvā yajñiye kāle vavre yuktān sa ṛtvijaḥ|
kṛṣṇānumoditaḥ pārtho brāhmaṇān brahmavādinaḥ|| 6
अर्थ
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! इस प्रकार कहकर धर्मराज युधिष्ठिरने भगवान् श्रीकृष्णकी अनुमतिसे यज्ञके योग्य समय आनेपर यज्ञके कर्मोंमें निपुण वेदवादी ब्राह्मणोंको ऋत्विज्, आचार्य आदिके रूपमें वरण किया॥ ६॥
इत्युक्त्वा यज्ञिये काले वव्रे युक्तान् स ऋत्विजः।
कृष्णानुमोदितः पार्थो ब्राह्मणान् ब्रह्मवादिनः॥ ६
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! इस प्रकार कहकर धर्मराज युधिष्ठिरने भगवान् श्रीकृष्णकी अनुमतिसे यज्ञके योग्य समय आनेपर यज्ञके कर्मोंमें निपुण वेदवादी ब्राह्मणोंको ऋत्विज्, आचार्य आदिके रूपमें वरण किया॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.74.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 592) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/74/6/