श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.75.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 75 · अथ पञ्चसप्ततितमोऽध्यायः

पत्‍नीसंयाजावभृथ्यैश्‍चरित्वा ते तमृत्विजः।

आचान्तं स्नापयांचक्रुर्गंगायां सह कृष्णया॥ १९

patnīsaṃyājāvabhṛthyaiścaritvā te tamṛtvijaḥ|

ācāntaṃ snāpayāṃcakrurgaṃgāyāṃ saha kṛṣṇayā|| 19

अर्थ

ऋत्विजोंने पत्‍नी-संयाज (एक प्रकारका यज्ञकर्म) तथा यज्ञान्त-स्नानसम्बन्धी कर्म करवाकर द्रौपदीके साथ सम्राट् युधिष्ठिरको आचमन करवाया और इसके बाद गंगास्नान॥ १९॥

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