॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.75.30
इत्थं राजा धर्मसुतो मनोरथमहार्णवम्।
सुदुस्तरं समुत्तीर्य कृष्णेनासीद् गतज्वरः॥ ३०
itthaṃ rājā dharmasuto manorathamahārṇavam|
sudustaraṃ samuttīrya kṛṣṇenāsīd gatajvaraḥ|| 30
अर्थ
इस प्रकार धर्मनन्दन महाराज युधिष्ठिर मनोरथोंके महान् समुद्रको, जिसे पार करना अत्यन्त कठिन है, भगवान् श्रीकृष्णकी कृपासे अनायास ही पार कर गये और उनकी सारी चिन्ता मिट गयी॥ ३०॥