॥ श्रीहरिः ॥
यत्र यत्रोपलक्ष्येत ससौभः सहसैनिकः।
शाल्वस्ततस्ततोऽमुंचन् शरान् सात्वतयूथपाः॥ २३
yatra yatropalakṣyeta sasaubhaḥ sahasainikaḥ|
śālvastatastato'muṃcan śarān sātvatayūthapāḥ|| 23
अर्थ
शाल्व अपने विमान और सैनिकोंके साथ जहाँ-जहाँ दिखायी पड़ता, वहीं-वहीं यदुवंशी सेनापति बाणोंकी झड़ी लगा देते थे॥ २३॥
यत्र यत्रोपलक्ष्येत ससौभः सहसैनिकः।
शाल्वस्ततस्ततोऽमुंचन् शरान् सात्वतयूथपाः॥ २३
शाल्व अपने विमान और सैनिकोंके साथ जहाँ-जहाँ दिखायी पड़ता, वहीं-वहीं यदुवंशी सेनापति बाणोंकी झड़ी लगा देते थे॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.76.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 605) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/76/23/