श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.77.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 77 · अथ सप्तसप्ततितमोऽध्यायः

कुरुवृद्धाननुज्ञाप्य मुनींश्‍च ससुतां पृथाम्।

निमित्तान्यतिघोराणि पश्यन् द्वारवतीं ययौ॥ ७

kuruvṛddhānanujñāpya munīṃśca sasutāṃ pṛthām|

nimittānyatighorāṇi paśyan dvāravatīṃ yayau|| 7

अर्थ

वहाँ भगवान् श्रीकृष्णने देखा कि बड़े भयंकर अपशकुन हो रहे हैं। तब उन्होंने कुरुवंशके बड़े-बूढ़ों, ऋषि-मुनियों, कुन्ती और पाण्डवोंसे अनुमति लेकर द्वारकाके लिये प्रस्थान किया॥ ७॥

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