श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.78.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 78 · अथाष्टसप्ततितमोऽध्यायः

विदूरथस्तु तद‍्भ्राता भ्रातृशोकपरिप्लुतः।

आगच्छदसिचर्मभ्यामुच्छ्वसंस्तज्जिघांसया॥ ११

vidūrathastu tadbhrātā bhrātṛśokapariplutaḥ|

āgacchadasicarmabhyāmucchvasaṃstajjighāṃsayā|| 11

अर्थ

दन्तवक्त्रके भाईका नाम था विदूरथ। वह अपने भाईकी मृत्युसे अत्यन्त शोकाकुल हो गया। अब वह क्रोधके मारे लम्बी-लम्बी साँस लेता हुआ हाथमें ढाल-तलवार लेकर भगवान् श्रीकृष्णको मार डालनेकी इच्छासे आया॥ ११॥

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