श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.78.14

दशम स्कन्ध · अध्याय 78 · अथाष्टसप्ततितमोऽध्यायः

मुनिभिः सिद्धगन्धर्वैर्विद्याधरमहोरगैः।

अप्सरोभिः पितृगणैर्यक्षैः किन्‍नरचारणैः॥ १४

munibhiḥ siddhagandharvairvidyādharamahoragaiḥ|

apsarobhiḥ pitṛgaṇairyakṣaiḥ kinnaracāraṇaiḥ|| 14

अर्थ

इस प्रकार भगवान् श्रीकृष्णने शाल्व, उसके विमान सौभ, दन्तवक्त्र और विदूरथको, जिन्हें मारना दूसरोंके लिये अशक्य था, मारकर द्वारकापुरीमें प्रवेश किया। उस समय देवता और मनुष्य उनकी स्तुति कर रहे थे। बड़े-बड़े ऋषि-मुनि, सिद्ध-गन्धर्व, विद्याधर और वासुकि आदि महानाग, अप्सराएँ, पितर, यक्ष, किन्‍नर तथा चारण उनके ऊपर पुष्पोंकी वर्षा करते हुए उनकी विजयके गीत गा रहे थे। भगवान्‌के प्रवेशके अवसरपर पुरी खूब सजा दी गयी थी और बड़े-बड़े वृष्णिवंशी यादव वीर उनके पीछे-पीछे चल रहे थे॥ १३—१५॥

यह अर्थ श्लोक 13–15 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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