श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.78.38

दशम स्कन्ध · अध्याय 78 · अथाष्टसप्ततितमोऽध्यायः

ऋषय ऊचुः

इल्वलस्य सुतो घोरो बल्वलो नाम दानवः।

स दूषयति नः सत्रमेत्य पर्वणि पर्वणि॥ ३८

ilvalasya suto ghoro balvalo nāma dānavaḥ|

sa dūṣayati naḥ satrametya parvaṇi parvaṇi|| 38

अर्थ

ऋषियोंने कहा—बलरामजी! इल्वलका पुत्र बल्वल नामका एक भयंकर दानव है। वह प्रत्येक पर्वपर यहाँ आ पहुँचता है और हमारे इस सत्रको दूषित कर देता है॥ ३८॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें