॥ श्रीहरिः ॥
गदानिर्भिन्नहृदय उद्वमन् रुधिरं मुखात्।
प्रसार्य केशबाह्वङ्घ्रीन् धरण्यां न्यपतद् व्यसुः॥ ९
gadānirbhinnahṛdaya udvaman rudhiraṃ mukhāt|
prasārya keśabāhvaṅghrīn dharaṇyāṃ nyapatad vyasuḥ|| 9
अर्थ
गदाकी चोटसे दन्तवक्त्रका कलेजा फट गया। वह मुँहसे खून उगलने लगा। उसके बाल बिखर गये, भुजाएँ और पैर फैल गये। निदान निष्प्राण होकर वह धरतीपर गिर पड़ा॥ ९॥
गदानिर्भिन्नहृदय उद्वमन् रुधिरं मुखात्।
प्रसार्य केशबाह्वङ्घ्रीन् धरण्यां न्यपतद् व्यसुः॥ ९
गदाकी चोटसे दन्तवक्त्रका कलेजा फट गया। वह मुँहसे खून उगलने लगा। उसके बाल बिखर गये, भुजाएँ और पैर फैल गये। निदान निष्प्राण होकर वह धरतीपर गिर पड़ा॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.78.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 611) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/78/9/