अब भगवान् बलराम वहाँसे चलकर केरल और त्रिगर्त देशोंमें होकर भगवान् शंकरके क्षेत्र गोकर्णतीर्थमें आये। वहाँ सदा-सर्वदा भगवान् शंकर विराजमान रहते हैं॥ १९॥
ततोऽभिव्रज्य भगवान् केरलांस्तु त्रिगर्तकान्।
गोकर्णाख्यं शिवक्षेत्रं सान्निध्यं यत्र धूर्जटेः॥ १९
अब भगवान् बलराम वहाँसे चलकर केरल और त्रिगर्त देशोंमें होकर भगवान् शंकरके क्षेत्र गोकर्णतीर्थमें आये। वहाँ सदा-सर्वदा भगवान् शंकर विराजमान रहते हैं॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.79.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 617) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/79/19/