॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.79.7
संस्तुत्य मुनयो रामं प्रयुज्यावितथाशिषः।
अभ्यषिंचन् महाभागा वृत्रघ्नं विबुधा यथा॥ ७
saṃstutya munayo rāmaṃ prayujyāvitathāśiṣaḥ|
abhyaṣiṃcan mahābhāgā vṛtraghnaṃ vibudhā yathā|| 7
अर्थ
नैमिषारण्यवासी महाभाग्यवान् मुनियोंने बलरामजीकी स्तुति की, उन्हें कभी न व्यर्थ होनेवाले आशीर्वाद दिये और जैसे देवतालोग देवराज इन्द्रका अभिषेक करते हैं, वैसे ही उनका अभिषेक किया॥ ७॥