श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.80.15

दशम स्कन्ध · अध्याय 80 · अथाशीतितमोऽध्यायः

स तानादाय विप्राग्र्यः प्रययौ द्वारकां किल।

कृष्णसन्दर्शनं मह्यं कथं स्यादिति चिन्तयन्॥ १५

sa tānādāya viprāgryaḥ prayayau dvārakāṃ kila|

kṛṣṇasandarśanaṃ mahyaṃ kathaṃ syāditi cintayan|| 15

अर्थ

इसके बाद वे ब्राह्मणदेवता उन चिउड़ोंको लेकर द्वारकाके लिये चल पड़े। वे मार्गमें यह सोचते जाते थे कि ‘मुझे भगवान् श्रीकृष्णके दर्शन कैसे प्राप्त होंगे?’॥ १५॥

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