एक दिन दरिद्रताकी प्रतिमूर्ति दुःखिनी पतिव्रता भूखके मारे काँपती हुई अपने पतिदेवके पास गयी और मुरझाये हुए मुँहसे बोली—॥ ८॥
पतिव्रता पतिं प्राह म्लायता वदनेन सा।
दरिद्रा सीदमाना सा वेपमानाभिगम्य च॥ ८
एक दिन दरिद्रताकी प्रतिमूर्ति दुःखिनी पतिव्रता भूखके मारे काँपती हुई अपने पतिदेवके पास गयी और मुरझाये हुए मुँहसे बोली—॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.80.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 620) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/80/8/