श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.81.28

दशम स्कन्ध · अध्याय 81 · अथैकाशीतितमोऽध्यायः

प्रीतः स्वयं तया युक्तः प्रविष्टो निजमन्दिरम्।

मणिस्तम्भशतोपेतं महेन्द्रभवनं यथा॥ २८

prītaḥ svayaṃ tayā yuktaḥ praviṣṭo nijamandiram|

maṇistambhaśatopetaṃ mahendrabhavanaṃ yathā|| 28

अर्थ

उन्होंने अपनी पत्‍नीके साथ बड़े प्रेमसे अपने महलमें प्रवेश किया। उनका महल क्या था, मानो देवराज इन्द्रका निवासस्थान। इसमें मणियोंके सैकड़ों खंभे खड़े थे॥ २८॥

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