श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.82.32

दशम स्कन्ध · अध्याय 82 · अथ द‍्व्यशीतितमोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

नन्दस्तत्र यदून् प्राप्तान् ज्ञात्वा कृष्णपुरोगमान्।

तत्रागमद् वृतो गोपैरनःस्थार्थैर्दिदृक्षया॥ ३२

nandastatra yadūn prāptān jñātvā kṛṣṇapurogamān|

tatrāgamad vṛto gopairanaḥsthārthairdidṛkṣayā|| 32

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब नन्दबाबाको यह बात मालूम हुई कि श्रीकृष्ण आदि यदुवंशी कुरुक्षेत्रमें आये हुए हैं, तब वे गोपोंके साथ अपनी सारी सामग्री गाड़ियोंपर लादकर अपने प्रिय पुत्र श्रीकृष्ण-बलराम आदिको देखनेके लिये वहाँ आये॥ ३२॥

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