जब यह समाचार राजाओंको मिला, तब सब ओरसे समस्त अस्त्र-शस्त्रोंके तत्त्वज्ञ हजारों राजा अपने-अपने गुरुओंके साथ मेरे पिताजीकी राजधानीमें आने लगे॥ २०॥✎ 1716
श्रुत्वैतत् सर्वतो भूपा आययुर्मत्पितुः पुरम्।
सर्वास्त्रशस्त्रतत्त्वज्ञाः सोपाध्यायाः सहस्रशः॥ २०
जब यह समाचार राजाओंको मिला, तब सब ओरसे समस्त अस्त्र-शस्त्रोंके तत्त्वज्ञ हजारों राजा अपने-अपने गुरुओंके साथ मेरे पिताजीकी राजधानीमें आने लगे॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.83.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 640) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/83/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)