राजन्! जब इस प्रकार वसुदेवजीने धर्मपूर्वक ऋषियोंको वरण कर लिया, तब उन्होंने पुण्यक्षेत्र कुरुक्षेत्रमें परम धार्मिक वसुदेवजीके द्वारा उत्तमोत्तम सामग्रीसे युक्त यज्ञ करवाये॥ ४३॥
त एनमृषयो राजन् वृता धर्मेण धार्मिकम्।
तस्मिन्नयाजयन् क्षेत्रे मखैरुत्तमकल्पकैः॥ ४३
राजन्! जब इस प्रकार वसुदेवजीने धर्मपूर्वक ऋषियोंको वरण कर लिया, तब उन्होंने पुण्यक्षेत्र कुरुक्षेत्रमें परम धार्मिक वसुदेवजीके द्वारा उत्तमोत्तम सामग्रीसे युक्त यज्ञ करवाये॥ ४३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.84.43 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 648) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/84/43/