वसुदेवजीने पहले नेत्रोंमें अंजन और शरीरमें मक्खन लगा लिया; फिर उनकी देवकी आदि अठारह पत्नियोंके साथ उन्हें ऋत्विजोंने महाभिषेककी विधिसे वैसे ही अभिषेक कराया, जिस प्रकार प्राचीन कालमें नक्षत्रोंके साथ चन्द्रमाका अभिषेक हुआ था॥ ४७॥
तमभ्यषिंचन् विधिवदक्तमभ्यक्तमृत्विजः।
पत्नीभिरष्टादशभिः सोमराजमिवोडुभिः॥ ४७
वसुदेवजीने पहले नेत्रोंमें अंजन और शरीरमें मक्खन लगा लिया; फिर उनकी देवकी आदि अठारह पत्नियोंके साथ उन्हें ऋत्विजोंने महाभिषेककी विधिसे वैसे ही अभिषेक कराया, जिस प्रकार प्राचीन कालमें नक्षत्रोंके साथ चन्द्रमाका अभिषेक हुआ था॥ ४७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.84.47 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 649) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/84/47/