श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.85.18

दशम स्कन्ध · अध्याय 85 · अथ पञ्चाशीतितमोऽध्यायः

युवां न नः सुतौ साक्षात् प्रधानपुरुषेश्‍वरौ।

भूभारक्षत्रक्षपण अवतीर्णौ तथाऽऽत्थ ह॥ १८

yuvāṃ na naḥ sutau sākṣāt pradhānapuruṣeśvarau|

bhūbhārakṣatrakṣapaṇa avatīrṇau tathā''ttha ha|| 18

अर्थ

मैं जानता हूँ कि तुम दोनों मेरे पुत्र नहीं हो, सम्पूर्ण प्रकृति और जीवोंके स्वामी हो। पृथ्वीके भारभूत राजाओंके नाशके लिये ही तुमने अवतार ग्रहण किया है। यह बात तुमने मुझसे कही भी थी॥ १८॥

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