मैंने सुना है कि तुम्हारे गुरु सान्दीपनिजीके पुत्रको मरे बहुत दिन हो गये थे। उनको गुरुदक्षिणा देनेके लिये उनकी आज्ञा तथा कालकी प्रेरणासे तुम दोनोंने उनके पुत्रको यमपुरीसे वापस ला दिया॥ ३२॥
चिरान्मृतसुतादाने गुरुणा कालचोदितौ।
आनिन्यथुः पितृस्थानाद् गुरवे गुरुदक्षिणाम्॥ ३२
मैंने सुना है कि तुम्हारे गुरु सान्दीपनिजीके पुत्रको मरे बहुत दिन हो गये थे। उनको गुरुदक्षिणा देनेके लिये उनकी आज्ञा तथा कालकी प्रेरणासे तुम दोनोंने उनके पुत्रको यमपुरीसे वापस ला दिया॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.85.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 656) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/85/32/