॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.85.51
स्मरोद्गीथः परिष्वंगः पतंगः क्षुद्रभृद् घृणी।
षडिमे मत्प्रसादेन पुनर्यास्यन्ति सद्गतिम्॥ ५१
smarodgīthaḥ pariṣvaṃgaḥ pataṃgaḥ kṣudrabhṛd ghṛṇī|
ṣaḍime matprasādena punaryāsyanti sadgatim|| 51
अर्थ
इनके छः नाम हैं—स्मर, उद्गीथ, परिष्वंग, पतंग, क्षुद्रभृत् और घृणि। इन्हें मेरी कृपासे पुनः सद्गति प्राप्त होगी’॥ ५१॥✎ 1719